कतै नारी पुजिएकी छिन्

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२०७८ फाल्गुन २४ गते, मंगलवार १२:२८ मा प्रकाशित

कतै नारी पुजिएकी छिन्।
कतै नारी कुजिएकी छिन्।।
कतै नारी खुल्ला आकाशमा छिन्।
कतै नारी बन्द बाकसमा छिन्।।

कतै नारी सधै हासेकी छिन्।
कतै जल्दै बाचेकी छिन्।।
कतै नारी पुजिएकी छिन्।
कतै नारी कुजिएकी छिन्।।

कतै नारी दंग छिन्।
कतै पिडै पिडा सककंग छिन्।।
कतै नारी खुल्ला आकाशमा छिन्।
कतै नारी बन्द बाकसमा छिन्।।

कतै नारी हासोमा छिन्।
कतै नारी पासोमा छिन्।
कतै नारी पुजिएकी छिन।
कतै नारी कुजिएकी छिन्।।

कतै नारी हराएकी छिन्।
कतै नारी डराएकी छिन्।।
कतै नारी खुल्ला आकाशमा छिन्।
कतै नारी बन्द बाकसमा छिन।।

कतै नारी देवी छिन्।
कतै नारी दैत्य छिन।।
कतै नारी पुजिएकी छिन्।
कतै नारी कुजिएकी छिन्।
कतै नारी खुल्ला आकाशमा छिन्।
कतै नारी बन्द बाकसमा छिन्।।